कल गाँव में कोई शव नहीं जला

सुबह के आठ बज रहे थे। समय से पहले कार्यालय पहुँचने की मेरी पुरानी आदत है, इसलिए मैं दफ्तर आ चुका था। लाइन पर काम करने वाले कर्मचारी अभी तक नहीं आए थे। उस पसरे हुए सन्नाटे में, पिछली रात की वह खौफनाक घटना मेरे ज़ेहन में किसी डरावने साये की तरह अब भी घूम … Continue reading कल गाँव में कोई शव नहीं जला